PANDIT RAJAN JAITLY पंडित राजन जेटली
ASTROLOGER, Spiritual Healer & Mantra - Yantra - Tantra Sadhak (ज्योतिषी, आध्यात्मिक चिकित्सक व मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र साधक)
Monday, 26 October 2020
स्वास्थ्य प्रदाता रोग विनाशक कार्तिक
कार्तिक मास
Friday, 10 April 2020
श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्रम्
*श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्रम्*
श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगीन्द्रभोगमणिरंजितपुण्यमूर्ते।
योगीश शाश्वतशरण्यभवाब्धिपोतलक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम॥1॥
ब्रम्हेन्द्र-रुद्र-मरुदर्क-किरीट-कोटि-संघट्टितांघ्रि-कमलामलकान्तिकान्त।
लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्॥2॥
संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्र-भीकर-मृगप्रवरार्दितस्य।
आर्तस्य मत्सर-निदाघ-निपीडितस्यलक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्॥3॥
संसारकूप-मतिघोरमगाधमूलं सम्प्राप्य दुःखशत-सर्पसमाकुलस्य।
दीनस्य देव कृपणापदमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्॥4॥
संसार-सागर विशाल-करालकाल-नक्रग्रहग्रसन-निग्रह-विग्रहस्य।
व्यग्रस्य रागदसनोर्मिनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहिकरावलम्बम्॥5॥
संसारवृक्ष-भवबीजमनन्तकर्म-शाखाशतं करणपत्रमनंगपुष्पम्।
आरुह्य दुःखफलित पततो दयालो लक्ष्मीनृसिंहम देहिकरावलम्बम्॥6॥
संसारसर्पघनवक्त्र-भयोग्रतीव्र-दंष्ट्राकरालविषदग्ध-विनष्टमूर्ते।
नागारिवाहन-सुधाब्धिनिवास-शौरे लक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्॥7॥
संसारदावदहनातुर-भीकरोरु-ज्वालावलीभिरतिदग्धतनुरुहस्य।
त्वत्पादपद्म-सरसीशरणागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्॥8॥
संसारजालपतितस्य जगन्निवास सर्वेन्द्रियार्थ-बडिशार्थझषोपमस्य।
प्रत्खण्डित-प्रचुरतालुक-मस्तकस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहिकरावलम्बम्॥9॥
सारभी-करकरीन्द्रकलाभिघात-निष्पिष्टमर्मवपुषः सकलार्तिनाश।
प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्यलक्ष्मीनृसिंहमम देहि करावलम्बम्॥10॥
अन्धस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य चौरेः प्रभो बलि भिरिन्द्रियनामधेयै।
मोहान्धकूपकुहरे विनिपातितस्य लक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्॥11॥
लक्ष्मीपते कमलनाथ सुरेश विष्णो वैकुण्ठ कृष्ण मधुसूदन पुष्कराक्ष।
ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव देवेश देहि कृपणस्य करावलम्बम्॥12॥
यन्माययोर्जितवपुःप्रचुरप्रवाहमग्नाथमत्र निबहोरुकरावलम्बम्।
लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुवतेत स्तोत्र कृतं सुखकरं भुवि शंकरेण॥13॥
॥ इति श्रीमच्छंकराचार्याकृतं लक्ष्मीनृसिंहस्तोत्रं संपूर्णम् ॥
Monday, 22 July 2019
मंगलागौरी व्रत विधि
मंगला गौरी व्रत महत्व, पूजा विधि और कथा
मंगला गौरी का व्रत श्रावण मास के मंगलवार को किया जाता है। यह व्रत माता पार्वती यानी गौरी को समर्पित है। महाराष्ट्रीयन समाज में यह उनका श्रावण आरंभ होने पर किया जाता है लेकिन अन्य प्रांतों में इसे श्रावण मास के प्रथम मंगलवार से किया जाता है।
क्यों किया जाता है व्रत : कुंवारी कन्या, जिसके विवाह में बाधा आ रही है, वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए, पुत्र की प्राप्ति, पति/पुत्र की लंबी आयु, व अन्य सौभाग्य सुखों के लिए कुंवारी कन्या या सौभाग्यशाली-सुहागन स्त्री के द्वारा, इस व्रत को किया जाता है।
मंगला गौरी पूजन कब किया जाता है?
गौरी पूजन नाम से स्पष्ट है, मां गौरा अर्थात् माता पार्वती के लिए यह व्रत किया जाता है। पुराणों के अनुसार, भगवान शिव-पार्वती को श्रावण माह अति प्रिय है। यह व्रत श्रावण माह के मंगलवार को ही किया जाता है। इसलिए इसे मंगला गौरी कहा जाता है।
मंगला गौरी पूजन की आवश्यक सामग्री : गौरी पूजन में सुहाग के समान और 16-16 वस्तुओं का बहुत महत्व है।
आवश्यक सामग्री
1.
चौकी/पाटा/बाजोट, जो भी उपलब्ध हो ,पुजा के लिए रख लें।
2.
सफेद व लाल कपड़ा व कलश
3.
गेंहू व चावल
4. आटे का चौ-मुखी दीपक, अगरबत्ती, धुपबत्ती, कपूर, माचिस
5. 16-16 तार की चार बत्ती
6. साफ व पवित्र मिट्टी, माता गौरा की प्रतिमा बनाने के लिए
7. अभिषेक के लिए साफ जल, दूध, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर का मिश्रण)।
8. माता गौरा के लिए वस्त्र
9. पूजा सामग्री-मौली, रोली (कुमकुम), चावल, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, काजल, सिंदूर
10. 16 तरह के फूल, माला, पत्ते आटे के लड्डू, फल
11. पंचमेवा, 7 तरह के अनाज
12. 16 पान, सुपारी, लोंग
13. 1 सुहाग पिटारी
(जिसमें सिंदूर,बिंदी,नथ,काजल,मेहंदी,हल्दी,कंघा,तेल,शीशा,16 चूड़ियां,बिछिया,पायल,नैलपॉलिश,लिपस्टिक,बालों की पिन, चूनरी आदि शामिल हो)
14. इच्छानुसार नैवेद्य/प्रसाद
मंगला गौरी पूजा की विधि
* यह व्रत श्रावण के मंगलवार को किया जाता है। पूजा करने के पहले स्नान कर, कोरे वस्त्र पहनते हैं।
* पूर्व दिशा की तरफ मुंह कर बैठें, व बड़ी चौकी लगाएं उस चौकी पर आधे में सफेद कपड़ा बिछा कर चावल की 9 छोटी-छोटी ढेरी बनाएं अब उसी चौकी पर आधे में लाल कपड़ा बिछा कर गेंहू की 16 ढेरी बनाएं।
* अब चौकी पर थोड़े से चावल अलग से रख कर, पान के पत्ते पर स्वास्तिक बनाकर, उस पर गणेशजी की प्रतिमा रखें। ठीक उसी तरह, गेंहू की अलग से ढेरी कर उस पर कलश रखें। उस पर पांच पान के पत्ते रख, नारियल रखें। और चौकी पर चौमुखी दीपक व उसमें 16 तार की बत्ती लगाकर प्रज्वलित करें।
* सर्वप्रथम, प्रथम पूज्य गणेशजी की प्रतिमा का विधि विधान से स्नानादि करा कर, वस्त्र स्वरूप जनेऊ चढ़ा कर, रोली-चावल,सिंदूर चढ़ाकर पूजन कर भोग लगाएं ठीक उसी तरह, रोली-चावल से कलश और दीपक का पूजन करें। उसके बाद चावल की जो 9 ढेरी है,वह नवग्रह स्वरूप है तथा गेंहू की 16 ढेरी षोडषमातृका माता का स्वरूप मान विधिविधान से पूजा करें।
* अब एक थाली में पवित्र तथा साफ मिट्टी ले कर, मां गौरा की प्रतिमा बना कर,पूरी श्रद्धा से प्रतिमा को चौकी पर रखें। अब सबसे पहले प्रतिमा को जल दूध पंचामृत से स्नानादि करा कर अभिषेक कर, वस्त्र धारण कराएं।
* मां गौरी की रोली-चावल से पूजा कर सोलह श्रंगार की वस्तु चढ़ाएं। फिर 16 तरह की सभी चीजों- फूल, माला, फल, पत्ते, आटे के लड्डू, पान, सुपारी, लौंग, इलायची तथा पंचमेवा तथा प्रसाद रखें।
* अब कथा कर, मंत्र का जाप कर आरती करें। मंगलवार को पूजन के बाद अगले दिन, मां गौरा की प्रतिमा को किसी तालाब या नदी में, पूरी श्रद्धा से विसर्जित करें। मन्नत अनुसार यह व्रत पूर्ण कर उद्यापन करें।
मंगला गौरी पूजा व्रत की कथा
व्रत कथा:
एक नगर में एक व्यापारी अपनी पत्नी के साथ सुखी से जीवन जी रहा था। उसे धन दौलत की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी।
इसलिए सारी सुख सुविधाएं होते हुए थी दोनों पति पत्नी खुश नहीं रहते थे।
खूब पूजा अर्चना करने के बाद उन्हें पुत्र का वरदान प्राप्त हुआ। लेकिन ज्योतिषियों ने कहा कि वह अल्पायु है और 17 साल का होते ही उसकी मृत्यु हो जाएगी। इस बात को जानने के बाद पति-पत्नी और भी दुखी हो गए। लेकिन उन्होंने इसे ही अपना और पुत्र का भाग्य मान लिया।
कुछ समय बाद उन्होंने अपने बेटे की शादी एक सुंदर और संस्करी कन्या से कर दी। वह कन्या सदैव मंगला गौरी का व्रत करती और मां पार्वती का विधिवत पूजन करती थीं। मंगलागौरी व्रत के प्रभाव से उत्पन्न कन्या को अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त था।इसके परिणाम स्वरुप सेठ के पुत्र की मृत्यु टल गई और उसे दीर्घायु प्राप्त हुई।
पंडित राजन जेतली
Wednesday, 22 May 2019
संकटनाशन गणेशस्तोत्रम्
*संकटनाशन गणेशस्तोत्रम्*
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुंत्र विनायकम्
भक्तावासं स्मरे नित्यं आयुकामार्थसिद्धये ॥ १ ॥
प्रथमं वक्रतुंडं च एकदंतं द्वितियकम्
तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवकत्रं चतुर्थकम् ॥ २ ॥
लंबोदरं पंचमं च षष्टमं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाअष्टकम् ॥ ३ ॥
नवं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४ ॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्व सिद्धि करं प्रभो ॥ ५ ॥
विद्यार्थि लभते विद्यां धनार्थि लभते धनम्
पुत्रार्थि लभते पुत्रांमोक्षार्थि लभते गतिम् ॥ ६ ॥
जपेत्गणपतिस्तोत्रं षडभिमासै: फलं लभेत
संवतसरेणसिद्धिं च लभते नात्रसंशयः ॥ ७ ॥
अष्टभ्योब्राह्मणोभ्यस्य लिखित्वा य: समर्पयेत्
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥ ८ ॥
॥ इतिश्री नारदपुराणे ‘संकटनाशन गणेशस्तोत्रम्’ संपूर्णम् ॥
॥ श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्र ॥
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥
भावार्थ:- १.सुमुख २.एकदन्त ३.कपिल ४.गजकर्ण ५.लम्बोदर ६.विकट ७.विघ्ननाश ८.विनायक ९.धूम्रकेतु १०.गणाध्यक्ष ११.भालचन्द्र १२.गजानन ;
इन बारह नामों के पाठ करने व सुनने से छः स्थानों १.विद्यारम्भ २.विवाह ३.प्रवेश(प्रवेश करना) ४.निर्गम(निकलना) ५.संग्राम और ६.संकट में सभी विघ्नों का नाश होता है।
Sunday, 30 December 2018
वृषभ राशि - वार्षिक राशिफल 2019
वृषभ राशिफल - वार्षिक राशिफल 2019
Saturday, 29 December 2018
मेष राशि - वार्षिक राशिफल 2019
मेष राशि – चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ
Tuesday, 6 November 2018
राशि - लक्ष्मी मंत्र
दीपावली के दिन अथवा सामान्य तौर पर भी यदि आप अपनी राशि के अनुसार लक्ष्मी मंत्र का जाप करें तो उत्तम है, वैसे तो हमारी पुस्तक जिनके पास है उनके पास मन्त्र उपलब्ध हैं फिर भी आप सभी के लिए हम मन्त्र नीचे दे रहे हैं।
*राशि - लक्ष्मी मंत्र*
मेष - ॐ ऐं क्लीं सौं:
वृषभ - ॐ ऐं क्लीं श्रीं
मिथुन - ॐ क्लीं ऐं सौं:
कर्क - ॐ ऐं क्लीं श्रीं
सिंह - ॐ ह्रीं श्रीं सौं:
कन्या - ॐ श्रीं ऐं सौं:
तुला - ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
वृश्चिक - ॐ ऐं क्लीं सौं:
धनु - ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
मकर - ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं सौं:
कुंभ - ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं
मीन - ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
*Pandit Rajan Jaitly*
9971234977
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*दीपावली के उपाय*
*दीपावली के उपाय*
- सुबह नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें
- मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वस्तिक बनायें
- सुबह अपने सामर्थ्य अनुसार गेहूँ का दान करें
- घर में नमक मिले हुए पानी से पोछा लगायें
- आम के पत्तों का तोरण अपने दरवाजे पर लगायें
-मुख्य द्वार के दोनों तरफ गेहूँ के ढेर पर दीपक जलायें
- बिल्व वृक्ष / पीपल / गुलर के नीचे दीपक जलायें
*संक्षिप्त लक्ष्मी पूजन :*
चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी जी-गणेश जी सरस्वती जी और विष्णु जी की प्रतिमा /फोटो रखें, कुबेर जी की कोई फोटो या मूर्ति है तो वो भी रख सकते हैं
कोशिश कीजिये बैठ कर पूजन करें बहुत सारे घरों में मंदिर दिवार में लगाये होते हैं, आज के दिन जमीन पर चौकी बिछाकर, आसन बिछाकर बैठकर ही पूजन करें ।
कलश स्थापित करें
दो बड़े दीपक जलायें (1 तेल बायीं तरफ), 1 घी (दाईं तरफ)
एक दीपक गणेश जी के लिए भी जलायें
पूजा में इत्र की शीशी रखें, रुई पर इत्र लगाकर लक्ष्मी जी को समर्पित करें
भोग सामग्री:
नारियल
मखाना, सिंघाड़ा व सीताफल (शरीफा)
गन्ना, अनार, सेब व केला
बताशे
शहद वाला पान
कमलगट्टा, सुपारी, इलाइची, आँवला, तुलसी व सुपारी
सफ़ेद मिठाई
श्री सूक्त, महालक्ष्मी अष्टक या अपनी सुविधानुसार कोई भी महालक्ष्मी मंत्र जाप करें
लक्ष्मी जी की आरती करें
क्षमा प्रार्थना एवं शांति पाठ करें
पूजा के बाद पूरे घर में अलक्ष्मी निष्कासन के लिए शंख व डमरू बजाएं।
*Pandit Rajan Jaitly*
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Monday, 5 November 2018
दीपावली पर अपनी राशि का यह उपाय कर लें, मां लक्ष्मी ठहर जाएंगी आपके घर
*इस दीपावली पर अपनी राशि का यह उपाय कर लें, मां लक्ष्मी ठहर जाएंगी आपके घर में*
इस दीपावली अवसर न जाने दें अपनी राशि का उपाय कर ही डालें, बहुत सरल हैं यह 12 उपाय
दीपावली सिद्ध शुभ मुहूर्त है। इसे किसी भी तरह यूं ही नहीं जाने देना चाहिए। इस दिन कई प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन राशि के अनुसार उपाय आजमा कर लाभ को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
(1) मेष राशि : गणेशजी को बूंदी के लड्डू चढ़ाएं। रंगीन कंबल या गर्म कपड़े दान करें। कुत्तों को इमरती खिलाएं। नैऋत्य कोण में सरसों का दीपक रातभर जलाएं। पंडित राजन जेतली
(2) वृषभ राशि : हनुमानजी को गुड़-चना चढ़ाएं। बच्चों को रेवड़ियां बांटें। दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं।पंडित राजन जेतली
(3) मिथुन राशि : पानी वाला नारियल तथा बादाम दुर्गाजी को या काली मंदिर में दक्षिणा सहित चढ़ाएं (रात्रि में)। पक्षियों को दाना चुगाएं। घर के बड़ों-बुजुर्गों को वस्त्रादि भेंट करें। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।पंडित राजन जेतली
(4) कर्क राशि : हनुमानजी को बेसन के लड्डू चढ़ाएं। काली उड़द दान करें। तेल लगी रोटी कु्तों को खिलाएं। पश्चिम दिशा में घी का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(5) सिंह राशि : सप्तधान दान करें। उड़द का सामान बांटें। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(6) कन्या राशि : शनि मंदिर में तेल का दीपक लगाकर तेल दान करें। गरीबों को भोजन दान करें। नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(7) तुला राशि : पीपल में मीठा जल चढ़ाकर तेल का दीपक लगाएं रात्रि में। घर के पश्चिम में घी का दीपक तथा नैऋत्य में तेल का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(8) वृश्चिक राशि- रंगीन कंबल दान करें। घर के ब्रह्मस्थल पर घी का दीपक रातभर जलाएं। हनुमानजी को लड्डू का नैवेद्य लगाएं।पंडित राजन जेतली
(9) धनु राशि : गणेशजी को लड्डू चढ़ाएं। गाय को रोटी पर घी तथा गुड़ रखकर खिलाएं। शिवजी को जल में काले तिल मिलाकर चढ़ाएं। घर के नैऋत्य कोण में तेल का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(10) मकर राशि : साबुत मसूर दान करें। घर के बड़ों को भेंट दें। घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
(11) कुंभ राशि : दुर्गाजी को नारियल चढ़ाएं। पक्षियों को दाना चुगाएं। घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक लगाएं। सुगंधित जल से रुद्राभिषेक करें।पंडित राजन जेतली
(12) मीन राशि : शनि मंदिर में दीपक, तेल तथा काली उड़द दान करें। तेल लगी रोटी कुत्तों को खिलाएं। पश्चिम दिशा में घी का दीपक लगाएं।पंडित राजन जेतली
Pandit Rajan Jaitly
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Sunday, 4 November 2018
धनतेरस की पूजन विधि
*धनतेरस पूजन विधि*
(घर में धन धान्य वृद्धि और सुख शांति के लिए)
दिवाली से पहले धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि, भगवान महामृत्युंजय शिव, कुबेर और लक्ष्मी की पूजा की जाती है, साथ में धन को कमाने और उसके सदुपयोग की सद्बुद्धि के लिए गायत्री और गणेश के मन्त्रों से पूजा की जाती है। "पंडित राजन जेतली"
1- गुरु आवाहन मंत्र - *ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु, गुरुदेवो महेश्वरः । गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।*
2 - गणेश आवाहन मन्त्र - *ॐ एक दन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात ।।*
3- लक्ष्मी आवाहन मंत्र - *ॐ महा लक्ष्म्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।*
4 -दीपदान मंत्र ( कम से कम 5 या 11 या 21 घी के दीपकों को प्रज्वल्लित करें )-
*ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्नी: स्वाहा । सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा । अग्निर्वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्चो स्वाहा । सूर्यो वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्च: स्वाहा । ज्योतिः सूर्य्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा ।।*
5 - चौबीस (24) बार गायत्री मंत्र का जप करें - *ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् , भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् ।*
6 - तीन बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करें - *ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।*
7 - तीन बार लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जप करें - *ॐ महा लक्ष्म्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥*
8 - तीन बार गणेश मंत्र का जप करें - *ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥*
9 - तीन बार कुबेर का मंत्र जप करें - *ॐ यक्ष राजाय विद्महे, वैश्रवणाय धीमहि, तन्नो कुबेराय प्रचोदयात्॥*
10 - तीन बार आरोग्य देवता धन्वन्तरि गायत्री मन्त्र का जप करें- *ॐ तत् पुरुषाय विद्महे, अमृत कलश हस्ताय धीमहि, तन्नो धन्वन्तरि प्रचोदयात्*
11 - शान्तिपाठ - *ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ।*
दीपक नकारात्मकता का शमन कर सकारात्मक दैवीय शक्तियों को घर में प्रवेश देता है। इसलिए दीपक की जगह विद्युत् से जलने वाली LED या किसी भी प्रकार की लाईट नहीं ले सकती। घर के मुख्य् द्वार पर दो घी या सरसों या तिल के तेल के रुई बाती वाले दीपक, एक तुलसी के पास, एक रसोईं में और एक बड़ा मुख्य् दीपक सूर्यास्त के बाद जलाकर रख दें। फिर कलश स्थापना कर पूजन करें। दीपयज्ञ / दीपदान के बाद घर की तिज़ोरी / लेपटॉप / बैंक की पासबुक इत्यादि का पूजन अवश्य करें।
*धनतेरस 5 नवंबर 2018 की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त* *शाम 06:37 से लेकर 08:01* के बीच तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से धन, स्वास्थ्य और आयु बढ़ती है।
*घर में बना हलवा या खीर प्रसाद में चढ़ाएं। यदि बजट है तो चांदी या स्वर्ण का कुछ भी सामान ख़रीद ले शाम 6:30 से पहले, उसे दूध में नहला के पूजन स्थल में साफ़ स्टील की कटोरी में लाल वस्त्र के ऊपर रख लें। उसका तिलक चन्दन कर पूजन के पश्चात् तिज़ोरी में रख दें, दीपावली के दिन पुनः उसका पूजन होगा।*
*पंडित राजन जेतली शास्त्री*
दिल्ली
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