Friday, 13 July 2012

ध्यान रखने योग्य बातें

- यूं तो शिवजी की पूजा कभी भी कर सकते हैं, किन्तु प्रदोष काल’ (सूर्यास्त से एक घंटा पहले और बाद का समय) श्रेष्ठ माना गया है।
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सावन में हर दिन शिव पूजा के लिए प्रशस्त है, पर सोमवार, त्रयोदशी व शिव चौदस मुख्य हैं।
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शिव को भस्म, लाल चन्दन, रुद्राक्ष, आक के फूल, धतूरे का फल, भांग व बेलपत्र प्रिय हैं।
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भगवान शिव की पूजा वैदिक, पौराणिक या नाम मंत्रों से की जाती है। सामान्य व्यक्ति ऊँ नम: शिवायया ऊँ नमो भगवते रुद्रायमंत्र से उनका पूजन व अभिषेक कर सकता है।
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पूजा के बाद शिव महिमा स्तोत्र, शिव तांडव स्नोत्र या रुद्रायक का पाठ करना फलदायी है।
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भगवान शिव पर कदम्ब, मौलसिरी, कुन्द एवं जूही का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।
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अंत में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें। शिवजी पर चढ़ाये हुए फल, फूल एवं प्रसाद न लें।

Wednesday, 11 July 2012


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श्रावण मास में शिव पूजा राशि अनुसार करें आराधना : -

पुराणों के अनुसार जब देवी सती ने योग शक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था (उससे पहले सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण लिया था) अपने दुसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया | उन्होनें सावन महीनें में कठोर व्रत करके महादेव को प्रसन्न किया, जिसके बाद श्रावण मास महादेव को प्रिय हो गया | धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान् शिव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान श्रावण मास में ही किया था |

मेष राशि:- श्रावण मास में हर रोज बेलपत्र पर लाल चंदन से नम: शिवाय लिखें। इसी मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करें। तत्पश्चात यह बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

वृषभ राशि:- सर्वप्रथम शिवलिंग पर गंगाजल और दही से अभिषेक करें। उसके बाद कच्चा दूध चढ़ाएं। तत्पश्चात जल के साथ द्वादश ज्योर्तिलिंगों के मंत्रों का उच्चारण करें। शिवलिंग पर श्वेत चंदन से तिलक करें ।

मिथुन राशि:- हर रोज ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए गंगाजल में श्रद्धानुसार शहद मिलाकर अभिषेक करें।

कर्क राशि:- गंगाजल, दूध व मिश्री मिलाकर ऊँ चंद्र मोलेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

सिंह राशि:- श्रद्धानुसार शुद्ध देसी घी से ऊँ अनंनताय नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।

कन्या राशि:- ऊँ त्रिमूर्तितेय नम: मंत्र का जाप करते हुए दूध, घी और शहद से अभिषेक करें।

तुला राशि:- दही और गन्ने के रस से शिवलिंग पर ऊँ श्री कंठाय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

वृश्चिक राशि:- गंगाजल में दूध और शक्कर मिलाकर ऊँ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ऊं नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

धनु राशि:- गंगाजल, कच्चे दूध व केसर मिलाकर ऊँ महेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

मकर राशि:- बादाम के तेल से ऊँ सर्वभूतहराय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

कुंभ राशि:- घी, शहद और शक्कर से ऊँ अव्यक्ताय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

मीन राशि:- कच्चे दूध, केसर और तीर्थ जल मिलाकर ऊँ सर्वलोक प्रजापतये नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

Saturday, 7 July 2012

इनकी पूजा से ग्रह बाधा निवारण

माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है।

सूर्य से संबंधित बाधा है, तो विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए।

चंद्रमा से परेशान हैं, तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें।

मंगल से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा

बुध से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव का अभिषेक करना ठीक रहेगा।

बृहस्पति से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।

अगर आप शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।

शनि से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।

राहु-केतु से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा।

उपाय / Upay : मनोवांछित सफलता हेतु / FOR ACHIEVING DESIRES ...

हर रोज नित्यकर्म से निवृत हो स्नानोपरांत गीले कपड़ों में ही भगवान शनिदेव का ध्यान करते हुए तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें सात दानें लाल मिर्च, 1 लौंग, 1 काली मिर्च डालें। और ऊँ शं सूर्यपुत्राय नम:मंत्र का 108 बार जाप करते हुए सूर्य को अघ्र्य दें। ऐसा नियमित करें। ऐसा करने से मनोवांछित सफलता हासिल होती है।

Friday, 6 July 2012

श्रावण मास में इन उपायों /टोटकों से करें देवाधिदेव, भगवान् शिव को प्रसन्न----

श्रावण मास में इन उपायों /टोटकों से करें देवाधिदेव, भगवान् शिव को प्रसन्न----
सावन महीने की शुरुआत इस बार 4 जुलाई, बुधवार से हो चुकी है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इन महीने में भगवान शंकर की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।  ज्योतिषाचार्य पंडित राजन जेटली (09971234977) के अनुसार चूंकि तंत्र के देवता भी शिव ही हैं इसलिए इस महीने में किए गए टोटके से किसी भी इंसान की किस्मत बदल सकती है। यथा----- ---
भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। ----- प्रतिदिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊँ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं साथ ही एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें
----इस सावन मास में रोज किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं। जब तक यह काम करें मन ही मन में भगवान शिव का ध्यान करते रहें।
----महामृत्युंजय मन्त्र ....ॐ हौं जूं स:ॐ भूर्भुव:स्व:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम्पुष्टिवर्धनम // उर्व्वारुकमिवबन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ स्व:भुव:भू: ॐ स:जूं हौं ॐ..
-----फूल चढ़ाकर करें शिव को प्रसन्न-
.........शिवपुराण की रुद्रसंहिता में भगवान शिव का विभिन्न पुष्पों से पूजन करने तथा उनसे प्राप्त होने वाले फलों का विस्तृत वर्णन मिलता है जो इस प्रकार है-
 लाल व सफेद आंकड़े के फूल से शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है। - 
......चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।  ......- शमी पत्रों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।  ......... बेला के फूल से पूजन करने पर शुभ लक्षणों से युक्त पत्नी मिलती है।  .......... जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ........... कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नवीन वस्त्रों की प्राप्ति होती है। - ......... हरसिंगार के पुष्पों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है............।  ........- धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।  ......... लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।  ..........- दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।
----अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गल की धूप दें।
-----इस सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।
---पूरे सावन महीने में रोज गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों  की आत्मा को शांति मिलेगी।
----शिवमहापुराण में विभिन्न रसों से शिव की पूजा का वर्णन विस्तारपूर्वक किया गया है, जिससे साधक को कई रोगों से छुटकार मिल जाता है वहीं मन चाहे फल की प्राप्ति भी होती है।  यह इस प्रकार है- - ज्वर (बुखार) से पीड़ित होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्रताशीघ्र लाभ मिलता है।...  -----सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।....  ---- नपुंसक व्यक्ति अगर घी से शिव की पूजा करे व ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान हो जाता है। .... - ----तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।......  - सुगंधित तेल से शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है। ...... - ---भगवान शिव पर ईख (गन्ना) के रस की धारा चढ़ाई जाए तो सभी आनन्दों की प्राप्ति होती है। .... ----.- शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। ....... ----- मधु (शहद) की धारा शिव पर चढ़ाने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग दूर हो जाता है।
धर्म ग्रंथों में भगवान शिव को विभिन्न प्रकार के अनाज अर्पित करने का भी विधान बताया गया है जो इस प्रकार है-
--- - भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है
----भगवान शिव को गेंहू चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।  यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने पश्चात गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।