Monday, 1 October 2012

शिव गायत्री मंत्र

शिव गायत्री मंत्र

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ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहितन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।'
इस मंत्र का विशेष विधि-विधान नहीं है। इस मंत्र को किसी भी सोमवार से प्रारंभ कर सकते हैं। इसी के साथ सोमवार का व्रत करेंतो श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होंगे।
शिवजी के सामने घी का दीपक लगाएँ। जब भी यह मंत्र करें एकाग्रचित्त होकर करें, पितृदोष, एवं कालसर्प दोष वाले व्यक्ति को यह मंत्र प्रतिदिन करना चाहिए। सामान्य व्यक्ति भी करे तो भविष्य में कष्ट नहीं आएगा।इस जाप से मानसिक शांति, यश,समृद्धि, कीर्ति प्राप्त होती है। शिव की कृपा का प्रसाद मिलता है।

Sunday, 30 September 2012

दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा के लिए टल जाता है



रोजाना स्नान के बाद जब भी कपड़े पहनें, पहले स्वर देखें और जिस तरफ स्वर चल रहा हो उस तरफ से कपड़े पहनना शुरू करें और साथ में यह मंत्र बोलते जाएं - ॐ जीवं रक्ष। इससे दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा के लिए टल जाता है।

Thursday, 27 September 2012

निवारण - पितृ दोष के बारे में मनीषियों का मत है कि पूर्व जन्म के पापों के कारण या पितरो के शाप के कारण यह दोष कुंडली में प्रकट होता है । अत: पित्र का निवारण पितृ पक्ष में शास्त्रोक्त विधि से किया जाता है ।
अन्य उपाय -
(1) प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है ।

(2) प्रत्येक अमावस्या को कंडे की धूनी लगाकर उसमें खीर का भोग लगाकर दक्षिण दिशा में पितरों का आव्हान करने व उनसे अपने कर्मों के लिये क्षमायाचना करने से भी लाभ मिलता है ।

(3) पिता का आदर करने, उनके चरण स्पर्श करने, पितातुल्य सभी मनुष्यों को आदर देने से सूर्य मजबूत होता है ।


(4) सूर्योदय के समय किसी आसन पर खड़े होकर सूर्य को निहारने, उससे शक्ति देने की प्रार्थना करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य मजबूत होता है ।


(5) सूर्य को मजबूत करने के लिए माणिक भी पहना जाता है, मगर यह कूंडली में सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है ।

यह तय है कि पितृदोष होने से जातक को श्रम अधिक करना पड़ता है, फल कम व देर से मिलता है । अत: इस हेतु मानसिक तैयरी करना व परिश्रम की आदत डालना श्रेयस्कर रहता है ।

Monday, 27 August 2012

उपाय / Upay : दांपत्य सुख की प्राप्ति के लिए / CURE FOR PEACEFUL MARITAL LIFE ...


यदि हमेशा पति-पत्नी के आपस में विरोध रहता हो, बेवजह टकराव होती हो तो किसी भी सोमवार के दिन शुभ मुहूत्र्त में अपने सोने वाले पंलग के चारों कोनों पर चांदी की कील गाड़ दें। परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा।

Sunday, 26 August 2012

नजरदोष कारण और निवारण


नजरदोष कारण और निवारण
ऊपरी हवाओं से बचाव हेतु कुछ अनुभूत प्रयोग
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लहसुन के तेल में हींग मिलाकर दो बूंद नाक में डालने से ऊपरी बाधा दूर होती है।
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रविवार को सहदेई की जड़, तुलसी के आठ पत्ते और आठ काली मिर्च किसी कपड़े में बांधकर काले धागे से गले में बांधने से ऊपरी हवाएं सताना बंद कर देती हैं।
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नीम के पत्ते, हींग, सरसों बच व सांप की केचुली की धूनी से भी ऊपरी बाधा दूर होती है।
• रविवार को काले धतूरे की जड़ हाथ में बांधने से ऊपरी बाधा दूर होती है।
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गंगाजल में तुलसी के पत्ते व काली मिर्च पीसकर घर में छिड़कने से ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिलती है।
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हनुमान जी की उपासना अत्यंत लाभकारी होती है।
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राम रक्षा कवच या रामवचन कवच पढ़ने से तुरंत लाभ मिलता है।
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पेरीडॉट, संग सुलेमानी, क्राइसो लाइट, कार्नेलियन जेट, साइट्रीन, क्राइसो प्रेज जैसे रत्न धारण करने से भी लाभ मिलता है।
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गायत्री मंत्र का जप करें। (सुबह की अपेक्षा संध्या समय किया गया गायत्री मंत्र का जप अधिक लाभकारी होता है।)……………

Saturday, 25 August 2012

उपाय / Upay : हृदय रोग निवारण हेतु

हृदय संबंधी बीमारी से बचने के लिए शनिवार के दिन अभिजित मुहूत्र्त में बारह मुखी रुद्राक्ष के पांच दानें लाल धागे में पिरोकर 108 बार ऊँ शं आर्यगणस्तुत्याय नम:मंत्र का जाप करते हुए अपने गले में धारण कर लें। साथ ही सवा मीटर लाल कपड़ा, पांच मुखी 5 रुद्राक्ष के दानें, लाल हकीक, 5 लाल गुंजा को रोगी को ऊपर से सात बार उसार कर के शनिवार के दिन राहुकाल में बहते पानी में प्रवाहित करें। कष्टों से छुटकारा मिलेगा।