Friday, 11 January 2013

शनि के दुष्प्रभावों को दूर करने के उपाय:



शनि के दुष्प्रभावों को दूर करने के उपाय:

शनि के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कुछ उपाय, अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग तरह से बताए गए हैं जिनमें से कुछ उपायों का विवरण निम्नानुसार है।
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शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढे़साती या ढैया के दौरान मांस एवं मंदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
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काले रंग के वस्त्र में 740 ग्राम काले उड़द और तांबे का सिक्का बांधकर बहते हुए पानी में बहाने से लाभ होता है।
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शनिवार को श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक व्रत करें।
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शनि से संबंधित वस्तुएं घर में स्थापित करें।
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लोहे की वस्तुएं दान करें।
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शनि स्तोत्र का पाठ व जप करें।
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घर में भूरे पत्थर की शिला स्थापित करना शुभ है।
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शनि से संबंधित वस्तुएं (तेल, चमड़ा, तांबा, वस्त्र, लोहा, काले तिल आदि) दान में न लें।
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बड़े बूढ़ों का आशीर्वाद लें व उनकी सेवा करें।
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लोहे का बिना जोड़ वाला छल्ला दायें हाथ की बड़ी उंगली में पहनें।
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शुक्रवार की रात 750 ग्राम काले तिल भिगोकर सुबह शनिवार को काले घोड़े को खिलाएं।
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अपने चरित्र का विशेष ध्यान रखें।
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पैतृक संपत्तियों का विक्रय किसी भी कीमत पर न करें।
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शनिवार को न तो लोहा खरीदें और न हीं बेचें।
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शनिवार को भी सूर्य को अघ्र्य दें।
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वृष राशि आदि में यदि साढ़ेसाती या ढैया हो, तो अमावस्या को किसी नाले में नीले फूल डालें।
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अपने मकान व बिस्तर के चारों कोनों पर लोहे की चार कीलें गाड़ें।
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घर के अंधेरे कमरों में लोहे के पात्रों में सरसों का तेल भरकर रखें।
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यदि संभव हो तो काला कुत्ता पालें।
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धन की रक्षा के लिए एक नारियल काले कपड़े में लपेट कर तिजोरी में रखें।
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शनिवार को गुड़ में काले तिल के लड्डू बनाकर दान करें।
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शनिदोष निवारक यंत्र: किसी योग्य तांत्रिक या गुरु द्वारा प्रदत्त शनि दोष निवारक यंत्र प्राण प्रतिष्ठित कर घर में स्थापित करें या करवाएं। इसके अतिरिक्त इस यंत्र का विधिपूर्वक पूजन-अर्चन व साधना कर गले या बाजू में बांधने से शनि की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है।
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शनि पीड़ा निवारक यंत्र को किसी पत्थर के चैकोर टुकड़े पर काली स्याही से लिखकर रोगी अथवा शनि से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से सात बार घुमाकर ‘‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’’ मंत्रा का उच्चारण करते हुए किसी कुएं में डालने से शनि की दशा, अंतर्दशा, ढैया या साढ़ेसाती की पीड़ा का शमन होता है। जो व्यक्ति यह प्रयोग करेगा उसे अपनी सुरक्षा के लिए बाद में सवा पाव मदिरा बहते पानी में प्रवाहित करनी पड़ेगी, अन्यथा उसे कष्ट होगा।
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संपूर्ण बाधा मुक्ति यंत्र प्राप्त कर पूजा स्थल पर प्राणप्रतिष्ठित कर रखें एवं वहां नित्यप्रति धूप एवं दीप जलाएं।
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लाभकारी महिमा मंडित पारद माला: किसी योग्य तांत्रिक गुरु द्वारा निर्मित व प्राण प्रतिष्ठित, महिमामंडित शुद्ध पारदमाला धारण करने से भी साढ़ेसाती, ढैया या शनि की दशा-अंतर्दशा के दोष निवारण में लाभ होता है।
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शनि दोष निवारक पिरामिड: किसी योग्य गुरु द्वारा निर्मित व प्राण-प्रतिष्ठित शनि पिरामिड का प्रयोग कर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैया के दोष का निवारण कर सकते हैं।
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शनि दोष निवारक पारद शिवलिंग के अचूक प्रयोग: शनि की महादशा, अंतर्दशा, ढैया एवं साढेसाती तथा पंचम शनि के दोष निवारण हेतु पारद शिवलिंग की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पारद शिवलिंग की उपासना व्यक्ति को निरोगी बनाती है। असाद्य रोगों से छुटकारा पाने के लिए यह एक अचूक उपाय है। जिस व्यक्ति को मारकेश की दशा चल रही हो, उसके लिए यह प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।
प्रयोग विधि: रोग से मुक्ति व शनि की साढे़साती तथा अन्य सभी दशाओं की पीड़ा से रक्षा के उद्देश्य से पारद शिवलिंग की अर्चना करने वाले साधकों को रात्रि में सवा नौ बजे के उपरांत सवा पाव दूध से पारद शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के समय निम्नलिखित मंत्र का जप करें।
मंत्र: ‘‘ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः स्वः पारदेशंय्यजामहे,
सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। ॐ र्वारुकमिव बंधनान्मृत्यो र्मुक्षीय मा{मृतात् भूर्भुवः स्वः ॐ जूं सः हौं ॐ।।’’
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शनिदोष निवारण हेतु हनुमान प्रयोग: दीपावली या शनिपुष्य या किसी भी शनिवार को हनुमान जी के मंदिर में तिल का सवा किलो तेल चढ़ाएं तथा निम्नलिखित मंत्र का यथासंभव जप करें।
मंत्र: ‘‘ॐ ऐं ओं ह्रां ह्रीं ह्रौं ह्रः ॐ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत, प्रेत पिशाच, ब्रह्म राक्षस, शाकिनी डाकिनी, यक्षिणी, पूतना, मारी, महामारी राक्षस, भैरव, बेताल, ग्रह, राक्षसादि कान्, शिक्षय, महा माहेश्वर रुद्रावतार, ॐ ह्रं पफट् स्वाहा।’’
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रत्न धारण द्वारा: किसी योग्य तांत्रिक गुरु या रत्न विशेषज्ञ से 5 से 9 मासा तक का शुद्ध नीलम प्राप्त कर किसी भी शनिवार को या शनि पुष्य नक्षत्र या शनि जयंती को धारण करना चाहिए। यदि जन्मकुंडली में शनि प्रधान ग्रह हो अथवा, यदि सूर्य के साथ बैठा हो, अथवा यदि मेष आदि राशि में स्थित हो अथवा यदि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान में स्थित हो अथवा यदि जातक का जन्म मेष, वृष, तुला, अथवा वृश्चिक लग्न में हुआ हो तो उस स्थिति में भी नीलम धारण किया जा सकता है।
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जड़ी-बूटी: किसी भी शनिवार को अथवा शनि पुष्य, रवि पुष्य, गुरु पुष्य, शनि जयंती, शनि पूर्णिमा या शनि अमावस्या को अथवा दशहरे, दीपावली, होली या किसी भी ग्रहण के समय शमी वृक्ष की जड़ तांत्रिक विधि विधान द्वारा प्राप्त कर तथा तांत्रोक्त विधि से ही पूजा-अर्चना कर गले या दायीं भुजा में शनि स्तोत्र का जप करते हुए धारण करने से सभी प्रकार की शनि पीड़ा में लाभ होता है। यह प्रयोग अनुभूत है।
आम धारणा है कि प्रत्येक व्यक्ति को शनि की साढ़ेसाती ढैया, दशा, अंतर्दशा आदि में अनेक दुख भोगने पड़ते हैं, किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। शनि एक ओर शुभ स्वगृही व मित्र राशियों में शुभ फल प्रदान करता है, तो दूसरी ओर क्रूर होने, वक्री होने, शत्रु ग्रह में एवं शत्रु राशि में होने पर अशुभ फल प्रदान करता है। यदि किसी जातक की शनि की महादशा अथवा अंतर्दशा चल रही हो और उस अवधि में जातक की राशि में ढैया या साढ़ेसाती शनि का प्रवेश हो जाए, तो जातक के लिए वह समय बहुत ही शुभ होता है।

Tuesday, 8 January 2013

वार्षिक राशिफल - 2013 मीन



वार्षिक राशिफल - 2013
मीन
मीन राशि में जन्म होने के कारण आप
श्रद्धालु और धार्मिक प्रवृत्ति के हो सकते हैं। गुप्त विद्याओं के प्रति आपका आकर्षण होना स्वाभाविक है। अज्ञात और रहस्य की खोज में आपकी रुचि हो सकती है। आप एक आदर्शवादी व्यक्ति हैं। लेकिन कई बार दुनिया के कठोर सत्य से दूर भागकर उनसे बचने के उपाय ढूंढने के बजाय आप दिवा स्वप्नों में खो जाना चाहते हैं। आपमें जनकल्याण की भावना है। आप सौन्दर्य पर जल्दी मुग्ध हो जाते हैं। आम तौर पर, आप सिद्धांतों के अनुयायी रूढ़िवादी हैं, तो आप धार्मिक रिवाजों और प्रथाओं के पालन में अंधविश्वासी, कठोर भी हो सकते हैं।
पारिवारिक मामलों के लिए यह साल
अच्छा नहीं कहा जाएगा इसलिए घर परिवार से जुडे मामलों को निबटाने में बडी सतर्कता बरतें। यद्यपि आप अपने पारिवारिक उत्थान के लिये कुछ महत्वपूर्ण कार्य करना चाहेंगे, हो सकता है आप उसमें किसी कदर कामयाब भी हो जाएं लेकिन उसका श्रेय आपको मिलने में संदेह है। आपके मित्र और सहयोगी जन आपनी बातों से मुकर सकते हैं। अत: आत्मनिर्भरता उचित रहेगी। परिवार के लोगों के बर्ताव में भी आप कुछ अंतर महसूस करेंगे। इन तमाम कारणों से आप मानसिक रूप से कष्ट का अनुभव करेंगे।
स्वास्थ्य के लिहाज से वर्ष को अनुकूल नहीं कहा
जाएगा। यद्यपि बीमारी या रोग छोटे ही होंगे लेकिन परेशानी अक्सर बनी रह सकती है। रक्त और त्वचा से संबंधित रोगों के पनपने की संभावना है। इस समय आपकों खान-पान पर भी नियंत्रण रखने की आवश्यकता है क्योंकि पेट से संबंधित कुछ परेशानियां भी हो सकती हैं। मन में अनजानी आशंका से आप स्वयं को डरा अनुभव करेंगे। कभी-कभी भ्रम की स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। शरीर की गर्मी के कारण आप फोड़े- फुसिंयों भी पनपेंगी। लेकिन ये सारी परेशानियां कुछ समय के लिए हो सकती है और शीघ्र ही ठीक भी हो जाया करेंगी।
प्रेम
प्रसंगों के लिए यह वर्ष अधिक अनुकूल नहीं है। यदि आप दो नावों पर सवार होना चाहते हैं यह सही नहीं हैं। इसलिए अच्छा यही होगा कि सही निर्णय लेने का प्रयास करें। अपने आचरण में शांति और धैर्य का भाव रखें। यदि आपने पूर्व में कुछ संबंधों को बहुत हल्के ढंग से लिया है तो उसका परिणाम अब भुगतना पड़ सकता है। अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखें अन्यथा आपके घनिष्ट मित्र भी आपसे दूरियां बनाने लगेंगे। मित्रों का सहयोग अपेक्षाकृत कम मिलेगा जिससे आपका मन अशांत रह सकता है। लेकिन यदि आप शादी शुदा हैं तो वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा।
कार्यक्षेत्र के लिहाज़ से यह साल बहुत अनुकूल नहीं है।
मालिक या किसी सत्ताधारी से संबंध बिगड जाने के कारण व्यापार या कार्यक्षेत्र प्रभावित रह सकता है। काम धंधा अच्छा नहीं चलेगा। लेन देन के व्यापार में हानि होने की भी संभावना है। कार्यक्षेत्र से सम्बंधित कुछ न कुछ परेशानियां आपको सदैव घेरे रहेंगी। इन तमाम कारणों के चलते इस अवधि में किसी नए काम के बारे में सोचना या नए काम की शुरुआत करना जोखिम भरा काम होगा। आप स्वयं में आत्मविश्वास की कमी का अनुभव करेंगे। यात्राओं से भी कोई विशेषलाभ नहीं होने वाला है अत: व्यर्थ की यात्राओं से बचें।
इस
वर्ष की शुरुआत में आपकी आमदनी प्रभावित रहेगी। इस कारण आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी। किसी नए काम को शुरु करने के लिए बडा निवेश करने से बचें अन्यथा धन व्यर्थ हो सकता है। लेकिन इस वर्ष अचानक धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। इस अवधि में यदि कहीं से वसीयत प्राप्त होने की उम्मीद बन रही होगी और आप उसको प्राप्त करने के लिये इच्छुक होंगे तो वह आपको इस वर्ष आपको मिल सकती है। यदि आप जुआं, लाटरी आदि के माध्यम से कमाई करते हैं तो इनमें बडा निवेश करने से बचें।
इस वर्ष का प्रथम भाग आपकी शिक्षा के
लिए अनुकूल नहीं है। आप अपनी विषय वस्तु पर पूरी तरह से ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाएंगे। इस वर्ष यदि आप किसी नए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाह रहें हैं तो आपको सावधानी से काम लेने जरूरी होगा। नए पाठ्यक्रम और नए शिक्षण संस्थान दोनो के बारे में विधिवत जानकारी लेने के बाद ही प्रवेश लेना ठीक रहेगा। लेकिन वर्ष का दूसरा भाग आपके लिए अनुकूल रहेगा। जो लोग दूर देश में जाकर शिक्षा लेना चाह रहे हैं, उनके लिए भी वर्ष का दूसरा भाग अनुकूलता लाएगा।

Monday, 7 January 2013

वार्षिक राशिफल - 2013 कुम्भ

वार्षिक राशिफल - 2013

कुम्भ 


आप दार्शनिक, उदार और अत्यधिक सहानुभूति रखने वाले हैं। शारीरिक रूप से आप आकर्षक हैं। आप व्यवहार से शिष्ट हैं। इस कारण से आपके मित्र जल्दी बन जाते हैं। गुस्सा और चिड़चिड़ापन आप पर जल्दी प्रभावी हो जाते हैं लेकिन आप इन पर शीघ्र नियंत्रण भी पा लेते हैं। आप एक अच्छे वक्ता और बातूनी हो सकते हैं। शुरू में आप अपनी प्रतिभा को व्यक्त करने में शरमाते हैं। आप बुद्धिमान, स्मृति में अच्छे और मुद्दे को तथ्यों के साथ निपटने में सक्षम हो सकते हैं। हो सकता है कि आपको अपने परिवार से ज्यादा सुख न मिल पाए।
पारिवारिक दृष्टिकोण से वर्ष का प्रथम भाग अनुकूल रहेगा। परिवार में सुख और शान्ति का वातावरण बनेगा। आप पारिवारिक सुख प्राप्त करेंगे। लेकिन वर्ष के दूसरे भाग में गुरूजनों और माता पिता से संबंध बहुत अच्छे नहीं रहेंगे। आपके भीतर कुछ अहंकार युक्त भावनाएं पनप सकती हैं जिससे घर-परिवार में आपकी जनप्रियता घट सकती है। बेहतर होगा आप अपनी अन्तर्दृष्टि से स्वयं को परखें। जरूरत से ज्यादा तर्क वितर्क करने से भी बचें अन्यथा परिवारिक जनों को आपकी निष्ठा और आपके पारिवारिक स्नेह पर संदेह होने लगेगा।
यह वर्ष आपके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल रहेगा। साधारण या छोटी-मोटी बीमारियों को छोड दिया जाय तो लगभग पूरा वर्ष ही आपके स्वास्थ्य पर अनुकूलता बनाए रहेगा। मौसम जनित किसी बीमारी से आपको कष्ट होता भी है तो वह जल्द ही दूर भी हो जाएगा। इस अवधि का उपयोग आप मन को एकाग्र करने समाधि और योग क्रियाओं को करने के लिए भी कर सकते हैं। इससे आपमे उत्साह का संचार होगा और अपने स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने में कामयाब रहेंगे। समय-समय पर आप जलवायु परिवर्तन करने जाते रहेंगे।
प्रेम प्रसंगों के लिए यह वर्ष मिलाजुला परिणाम देगा। वर्ष के आरम्भिक महीने प्रेम प्रसंगों में मनमुटाव पैदा कर सकते हैं। किसी खास वजह से जीवनसाथी नाराज रह सकता है। अत: किसी भी मुद्दे को लेकर जरूरत से ज्यादा जिद न करें। लेकिन वर्ष का दूसरा भाग बहुत ही अनुकूल रहेगा। यदि छोटे-मोटे मनमुटावों को छोड दिया जाय तो लगभग पूरा साल ही आपको दिली शुकून देने वाला रहेगा। किसी पुराने रिश्तेदार या परिचित से स्नेह मिलेगा। जीवनसाथी के साथ घूमने फिरने के मौके मिलेंगे। दूर देशों की अथवा धर्म स्थलों से जुडी यात्राएं हो सकती हैं।
कार्य-व्यवसाय के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा। कुछ व्यवसायिक और अनुभवी व्यक्तियों से मिलकर आप अपनी कार्यशैली को और अधिक सुधार पाएंगे। व्यापार में बदलाव या नौकरी की पदोन्नति की संभावना है। सरकारी अफसरों, वरिष्ठ लोगों का सहयोग भी आपको मिल सकता है जिससे आपके कामों में लाभ का इजाफा हो सकता है। कुछ प्रतिस्पर्धी अडचने पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन आप उन पर नियंत्रण पा लेंगे। आप अपने लक्ष्य से भ्रमित नहीं होंगे और अपने काम को पूरा करके ही रहेंगे। यदि पदोन्नति होने वाली है तो यह पदोन्नति मनोनुकूल रहेगी।
इस वर्ष आपकी आमदनी में निरंतरता बनी रहेगी। लेकिन हो सकता है कि आप कोई बैंक बैलेंस न बना पाएं। क्योंकि इस वर्ष आप कोई सम्पति खरीद सकते हैं। घर की वस्तुओं चल अचल सम्पती आदि पर व्यय हो सकता है। किसी ने व्यापार या व्यवसाय को शुरु करने में खर्चे हो सकते हैं। आमदनी के किसी नए श्रोत के मिलने की भी उम्मीद है। कहीं से अचानक कोई बडा लाभ भी हो सकता है। यह भी एक कारण होगा आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का। यदि आपका पैसा कहीं रुका हुआ है तो थोडे से प्रयास से उसकी प्राप्ति हो सकती है।
अध्ययन के लिए यह वर्ष मिलाजुला रहेगा। कडी मेनत करने वालों को उत्तम परिणामों की प्राप्ति होगी लेकिन अध्ययन में लापरवाही करने वालों को रुकावट का सामना करना पड सकता है। ऐसे विद्यार्थी जो तर्कशास्त्र से संबंध रखते हैं उनके लिए समय अनुकूल रहेगा। अपने अध्यापकों और प्राध्यापकों से उत्तम रिश्ते बनाए रखने का प्रयास करें। उनसे की गई बेवजह बहसबाजी आपको परेशानी में डाल सकती है। प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए वर्ष का दूसरा भाग शुभ और अनुकूल है। विदेश जाकर शिक्षा लेने वालों के लिए समय मध्यम फलदायी है।

सफला एकादशी 8 को, भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है यह व्रत



सफला एकादशी 8 को, भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है यह व्रत

पौष मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 8 जनवरी, मंगलवार को है। इस एकादशी के महत्व का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को बताया है। पद्मपुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि- बड़े-बड़े यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना सफला एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है।
सफला एकादशी का व्रत अपने नाम के अनुसार सभी कार्यों में मनोवांछित सफलता प्रदान करता है। इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है और वह जीवन का सुख भोगकर मृत्यु पश्चात विष्णु लोक को प्राप्त होता है। यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी है। जो भक्त सफला एकादशी का व्रत रखते हैं व रात्रि में जागरण एवं भजन कीर्तन करते हैं उन्हें श्रेष्ठ यज्ञों से जो पुण्य मिलता उससे कहीं बढ़कर फल की प्राप्ति होती है। ऐसा पुराणों में वर्णित है