ASTROLOGER, Spiritual Healer & Mantra - Yantra - Tantra Sadhak (ज्योतिषी, आध्यात्मिक चिकित्सक व मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र साधक)
Monday, 18 February 2013
भगवान शिव को चढ़ाएं शमी का फूल, पूरी होंगी सभी मुरादें
सुप्रभात दोस्तों ,
आपका दिन मंगलमय हो !!!......
आपका दिन मंगलमय हो !!!......
भगवान शिव को चढ़ाएं शमी का फूल, पूरी होंगी सभी मुरादें
जानकारी के लिए जन्पत्रिका के साथ मिले या संपर्क करे
जानकारी के लिए जन्पत्रिका के साथ मिले या संपर्क करे
:-.ज्योतिषाचार्य.... पंडित राजन जेटली ..... 09971234977
धर्म शास्त्रो में भगवान शिव को जगत पिता बताया गया हैं, क्योकि भगवान शिव सर्वव्यापी एवं पूर्ण ब्रह्म हैं। हिंदू संस्कृति में शिव को मनुष्य के कल्याण का प्रतीक माना जाता हैं। शिव शब्द के उच्चारण या ध्यान मात्र से ही मनुष्य को परम आनंद प्रदान करता हैं। भगवान शिव भारतीय संस्कृति को दर्शन ज्ञान के द्वारा संजीवनी प्रदान करने वाले देव हैं। इसी कारण अनादि काल से भारतीय धर्म साधना में निराकार रूप में होते हुवे भी शिवलिंग के रूप में साकार मूर्ति की पूजा होती हैं।
आज हम आपको बताते हैं कि शिवलिंग पर कौन सा पुष्प चढ़ाना चाहिए और वह कितना पुण्य देने वाला है| शास्त्रों ने कुछ फूलों के चढाने से मिलने वाले फल का महत्व बतलाया है | वैसे भी पूजा में कुदरती सामग्रियों के चढ़ावे का महत्व है। जिनमें अनेक तरह-तरह के पेड़-पौधों के पत्ते, फूल और फल शामिल होते हैं। शास्त्रों में भगवान शिव पर फूल चढाने का बहुत अधिक महत्व बताया गया है|
एक फूल शिव पर चढ़ाना से सोने के दान के बराबर फल देता है वो है आक के फूल को चढाने से मिल जाता है , हज़ार आक के फूलों कि अपेक्षा एक कनेर का फूल, हज़ार कनेर के फूलों के चढाने कि अपेक्षा एक बिल्व-पत्र से मिल जाता है जिस तरह पापो के नाश के लिए शिव पर बिल्व पत्र से शिव खुश होते है|
हजार बिल्वपत्रों के बराबर एक द्रोण या गूमा फूल फलदायी। हजार गूमा के बराबर एक चिचिड़ा, हजार चिचिड़ा के बराबर एक कुश का फूल, हजार कुश फूलों के बराबर एक शमी का पत्ता, हजार शमी के पत्तो के बराकर एक नीलकमल, हजार नीलकमल से ज्यादा एक धतूरा और हजार धतूरों से भी ज्यादा एक शमी का फूल शुभ और पुण्य देने वाला होता है।
इसलिए भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए एक शमी का पुष्प चढ़ाएं क्योंकि यह फूल शुभ और पुण्य देने वाला होता है|
Sunday, 17 February 2013
शनि संकट समाधान
शनि संकट समाधान
पुजा सामग्रीः- एक लोटा खाली, कच्चा दुध, जल, शक्कर, सात प्रकार के धान (शनि के लिये बाजार मे उपलब्ध हैं), काले तिल, मधु (शहद शनि को अति प्रिय हैं)
प्रयोगः- लोटे मे जल लेकर कच्चा दुध मिला ले, अब थोडा थोडा मधु, शक्कर, काला तिल, सप्त धान मिला ले और मन ही मन मे कोई भी शनि मंत्र जपते रहे। फिर शनि मन्दिर मे पीपल के वक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुये मन ही मन मे सभी पापो के नाश
की कामना करते रहे। परिक्रमा पुरी होने पर शनि का (वेदिक मंत्र से) ध्यान करते हुये इस जल को चढाये। अब एक अपराधी की भांति अपने दोनो हाथो को अपनी कमर के पीछे रखे और बांध ले। मन मे वही घबराहट लाये जो एक अपराधी के मन मे होती हैं। जिस स्थान पर जल दिया हैं अपने घुटने मोडते हुये बेठ जाये और वहाँ माथा टिकाये। अब खडे हो जाओ फिर जल से गीली मिट्टी अपने माथे पर लगाये। सोचो मानो अमृत मिल गया हो फिर कामना करो कि शनि देव मेरे किये हुये पापो को सामाप्त कर रहे है या यह समझो कि बस पाप सामाप्त हो चुके। अब अपना लोटा लेकर सीधे घर आ जाओ। एक बार याद रहे कि पीछे मुड्कर मत देखना वरना तुम्हारे पाप फिर वापस आ जायेगे। क्योंकि तुम जिन पापो को इस प्रयोग के द्वारा पीपल के पेड के नीचे छोड़ आये थे वह तुम्हारा पीछा करेंगे यदि पीछे देखा तो वापस गले पड जायेगे। इसलिये पीछे देखने का अकसर निर्देश कही कही मिलता हैं जहाँ निर्देशित किया जाये वहाँ पीछे नहीं देखना चाहिये वरना वो चीज़ फिर पीछे लग जाती हैं। दुसरी बात यह की किसी को साथ मत लेकर जाना चाहे परिवार का ही क्यों ना हो। तीसरी बात यह कि आते-जाते समय किसी से बात मत करना क्योंकि बात करने से भी पुजा फल दुसरे व्यकिति को मिल जाता हैं। और यदि कोई गलती पीछे कही तीन बातों में से हो भी जाये तो उसी शाम को यह प्रयोग फिर करें। हाँ यदि नहीं करा तो तुम्हारी दिनो वाली गनती फिर जीरो हो जायेगी। मतलब अगले शनिवार जब यह प्रयोग करोगे तो वो पहला दिन हो जायेगा। घर आने के बाद हो सके तो काली गाय (या कोई भी) को बिना नमक का कुछ खिलाये या किसी जरुरतमन्द को अन्न (कुछ अन्न का बना मिठा जैसे लड्डू), वस्त्र (कुछ ना हो तो काला रुमाल हो), दक्षिणा दे (दक्षिणा रु इसलिये देते हैं क्योंकि पैसे देखकर हर कोई सामान ले लेता हैं शायद छोटा सा लालच हैं)। यदि दान से पहले या बाद मे शनि चालिसा या शनि स्त्रोत्र या शनि भार्या (पत्नी) स्त्रोत्र या “ॐ शं शनिश्चराये नमः” का 108 बार जाप कर ले तो मज़ा ही आजेगा। या दिल करें तो जितना इन सब मे से कर सको उतना कर लेना।
यह प्रयोग यदि आठ या ग्यारह शनिवार कर दिया तो जिन्दगी बदल जायेगी। निर्धनता समाप्त होकर सभी प्रकार के सुख का आन्नद मिलेगा। माँ लक्ष्मी ने श्री शनि जी को एक बार वचन दिया था कि जिस पर तुम प्रसन्न रहोगे मैं सदा वहाँ वास करूंगी। और जिससे तुम अप्रसन्न रहोगे मैं वहाँ से चली जाऊगीं। यदि हर अमावस्या को अपने भोजन करने से पहले अपने पित्तरो (खानदान मे मरे हुये लोगो) को याद कर लिया जाये थोडा सा मिठा-मिठाई उन के नाम से गाय को खिला दी जाये या कहीँ छत पर रख दी जाये थोडा सा जल सुर्या को दे दिया जाये यह सोचते हुये कि मेरे पित्तरो तक पहुँचा देना, तो पित्तर प्रसन्न रहते हैं। क्योकि बुजर्गो का आशीर्वाद हर मुसीबत से बचाय रखता हैं। यदि आप अपने पित्तरो को अमावस्या पर याद नहीं करते तो नवग्रह से पहले वो ही आपके कामो को बिगड देते हैं। और अनेको मुशीबत का सामना करना पडता हैं केई बार तो संतान भी नहीं होती या संतान होती भी हैं तो उसका होना या ना होना एक बराबर होता हैं। पीपल को जल देने से शनि के साथ साथ पित्तरो को भी प्रसन्नता होती हैं।
पुजा सामग्रीः- एक लोटा खाली, कच्चा दुध, जल, शक्कर, सात प्रकार के धान (शनि के लिये बाजार मे उपलब्ध हैं), काले तिल, मधु (शहद शनि को अति प्रिय हैं)
प्रयोगः- लोटे मे जल लेकर कच्चा दुध मिला ले, अब थोडा थोडा मधु, शक्कर, काला तिल, सप्त धान मिला ले और मन ही मन मे कोई भी शनि मंत्र जपते रहे। फिर शनि मन्दिर मे पीपल के वक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुये मन ही मन मे सभी पापो के नाश
की कामना करते रहे। परिक्रमा पुरी होने पर शनि का (वेदिक मंत्र से) ध्यान करते हुये इस जल को चढाये। अब एक अपराधी की भांति अपने दोनो हाथो को अपनी कमर के पीछे रखे और बांध ले। मन मे वही घबराहट लाये जो एक अपराधी के मन मे होती हैं। जिस स्थान पर जल दिया हैं अपने घुटने मोडते हुये बेठ जाये और वहाँ माथा टिकाये। अब खडे हो जाओ फिर जल से गीली मिट्टी अपने माथे पर लगाये। सोचो मानो अमृत मिल गया हो फिर कामना करो कि शनि देव मेरे किये हुये पापो को सामाप्त कर रहे है या यह समझो कि बस पाप सामाप्त हो चुके। अब अपना लोटा लेकर सीधे घर आ जाओ। एक बार याद रहे कि पीछे मुड्कर मत देखना वरना तुम्हारे पाप फिर वापस आ जायेगे। क्योंकि तुम जिन पापो को इस प्रयोग के द्वारा पीपल के पेड के नीचे छोड़ आये थे वह तुम्हारा पीछा करेंगे यदि पीछे देखा तो वापस गले पड जायेगे। इसलिये पीछे देखने का अकसर निर्देश कही कही मिलता हैं जहाँ निर्देशित किया जाये वहाँ पीछे नहीं देखना चाहिये वरना वो चीज़ फिर पीछे लग जाती हैं। दुसरी बात यह की किसी को साथ मत लेकर जाना चाहे परिवार का ही क्यों ना हो। तीसरी बात यह कि आते-जाते समय किसी से बात मत करना क्योंकि बात करने से भी पुजा फल दुसरे व्यकिति को मिल जाता हैं। और यदि कोई गलती पीछे कही तीन बातों में से हो भी जाये तो उसी शाम को यह प्रयोग फिर करें। हाँ यदि नहीं करा तो तुम्हारी दिनो वाली गनती फिर जीरो हो जायेगी। मतलब अगले शनिवार जब यह प्रयोग करोगे तो वो पहला दिन हो जायेगा। घर आने के बाद हो सके तो काली गाय (या कोई भी) को बिना नमक का कुछ खिलाये या किसी जरुरतमन्द को अन्न (कुछ अन्न का बना मिठा जैसे लड्डू), वस्त्र (कुछ ना हो तो काला रुमाल हो), दक्षिणा दे (दक्षिणा रु इसलिये देते हैं क्योंकि पैसे देखकर हर कोई सामान ले लेता हैं शायद छोटा सा लालच हैं)। यदि दान से पहले या बाद मे शनि चालिसा या शनि स्त्रोत्र या शनि भार्या (पत्नी) स्त्रोत्र या “ॐ शं शनिश्चराये नमः” का 108 बार जाप कर ले तो मज़ा ही आजेगा। या दिल करें तो जितना इन सब मे से कर सको उतना कर लेना।
यह प्रयोग यदि आठ या ग्यारह शनिवार कर दिया तो जिन्दगी बदल जायेगी। निर्धनता समाप्त होकर सभी प्रकार के सुख का आन्नद मिलेगा। माँ लक्ष्मी ने श्री शनि जी को एक बार वचन दिया था कि जिस पर तुम प्रसन्न रहोगे मैं सदा वहाँ वास करूंगी। और जिससे तुम अप्रसन्न रहोगे मैं वहाँ से चली जाऊगीं। यदि हर अमावस्या को अपने भोजन करने से पहले अपने पित्तरो (खानदान मे मरे हुये लोगो) को याद कर लिया जाये थोडा सा मिठा-मिठाई उन के नाम से गाय को खिला दी जाये या कहीँ छत पर रख दी जाये थोडा सा जल सुर्या को दे दिया जाये यह सोचते हुये कि मेरे पित्तरो तक पहुँचा देना, तो पित्तर प्रसन्न रहते हैं। क्योकि बुजर्गो का आशीर्वाद हर मुसीबत से बचाय रखता हैं। यदि आप अपने पित्तरो को अमावस्या पर याद नहीं करते तो नवग्रह से पहले वो ही आपके कामो को बिगड देते हैं। और अनेको मुशीबत का सामना करना पडता हैं केई बार तो संतान भी नहीं होती या संतान होती भी हैं तो उसका होना या ना होना एक बराबर होता हैं। पीपल को जल देने से शनि के साथ साथ पित्तरो को भी प्रसन्नता होती हैं।
Friday, 15 February 2013
कौन-सा फूल शिव को चढ़ाएं,
कौन-सा फूल शिव को चढ़ाएं,
इन मुरादों का संबंध दैनिक जीवन की जरूरतों और दायित्वों से है-
चमेली के फूल - वाहन सुख
कनेर के फूल - सुंदर वस्त्र,
परिधान
लाल फूल वाला
धतूरा - संतान विशेष रूप से पुत्र कामना।
दूर्वा -अच्छी सेहत और लंबी उम्र।
कमल, शतपत्र, शंखपुष्प,
बिल्वपत्र - धन,
वैभवशाली जीवन और
पापमुक्ति
जूही के फूल - भरपूर अन्न, निवास से जुड़ी कामना।
बेला के फूल - विवाह कामना। श्रेष्ठ सर्वगुण संपन्न जीवनसाथी
मिलता है।
अगस्त्य के फूल - ख्याति, पद और ऊंचा रुतबा।
शेफालिका के फूल - शांति
सफेद कमल फूल - मोक्ष।
तुलसी के पत्ते - हर पीड़ा से मुक्ति और हर सुख पूर्ति।
Thursday, 14 February 2013
कैसे कुबेर देव की कृपा प्राप्त हो
कैसे कुबेर देव की कृपा प्राप्त हो
कुबेर देव को धन का देवता माना जाता है। वे देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, इनकी कृपा से किसी को भी धन प्राप्ति के योग बन जाते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए एक सटिक मंत्र है, जिसके जप से कुबेर देव की कृपा प्राप्त हो जाती है।
कुबेर देव का मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहित दापय स्वाहा।
यह देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का अमोघ मंत्र है। इस मंत्र का तीन माह तक रोज 108 बार जप करें। जप करते समय अपने सामने एक कौड़ी (धनलक्ष्मी कौड़ी) रखें। तीन माह के बाद प्रयोग पूरा होने पर इस कौड़ी को अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें। ऐसा करने पर कुबेर देव की कृपा से आपका लॉकर कभी खाली नहीं होगा। हमेशा उसमें धन भरा रहेगा
कुबेर देव को धन का देवता माना जाता है। वे देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, इनकी कृपा से किसी को भी धन प्राप्ति के योग बन जाते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए एक सटिक मंत्र है, जिसके जप से कुबेर देव की कृपा प्राप्त हो जाती है।
कुबेर देव का मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहित दापय स्वाहा।
यह देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का अमोघ मंत्र है। इस मंत्र का तीन माह तक रोज 108 बार जप करें। जप करते समय अपने सामने एक कौड़ी (धनलक्ष्मी कौड़ी) रखें। तीन माह के बाद प्रयोग पूरा होने पर इस कौड़ी को अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें। ऐसा करने पर कुबेर देव की कृपा से आपका लॉकर कभी खाली नहीं होगा। हमेशा उसमें धन भरा रहेगा
Saturday, 2 February 2013
संतान प्राप्ति के लिए.....
संतान प्राप्ति के लिए.....
7 शनिवार को 2 उड़द के बड़े अपने सिर से घड़ी की विपरीत दिशा में घुमा कर प्रात:कौवों को डाल दें। ú नमो भगवते वासुदेवाय का रोज एक माला जाप करें तथा प्रभु से संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। जब भी संभव हो तो किसी कोढ़ी को शुद्ध देसी घी का मिष्ठïान खिलाएं।
Subscribe to:
Posts (Atom)