Friday, 3 January 2014

मेष राशि-वार्षिक राशिफल 2014



मेष राशि-वार्षिक राशिफल 2014

मेष राशि का स्वामी मंगल है। जो अग्नि तत्व का ग्रह है। इस राशि के जातक धन और कर्म की चिंता करने वाले एवं सदैव पाप कर्म करने से भय खाने वाले होते है। इस राशि के जातको में प्रशासनिक एवं नेतृत्व की क्षमता होती है। इनमे साहस, हिम्मत, संघर्ष, धैर्य, सहिष्णुता, आत्मविश्वास जैसे गुणो की भरमार होती है। यह अपनी हिम्मत के बल पर कठिन से कठिन कार्य को करने का हौसला रखते है। क्रोध के कारण ये कभी-कभी पारिवारिक कलह का वातावरण भी उत्पन्न कर देते है। आपके स्वभाव में संयमित एवं अनुशासित रहने का गुण जन्मजात से ही होता है। स्वभाव से हठी होने के कारण आप जो कार्य करने की ठानते है, उसे पूरा करके ही रहते है। कभी-कभी यह हठी स्वभाव नुकसानदायक भी हो जाता है। आप अपने जीवनसाथी के प्रति हमेशा वफादार रहते है।


2014
के अनुसार

वर्ष 2014 आपके लिए मध्यम फल देने वाला रहेगा। यदि आप समय का सदुपयोग कर मेहनत करेंगे तो आपको निश्चित तौर पर सफलता प्राप्त होगी। इस वर्ष कारोबार में आप नयी-नयी योजनाओ का क्रियान्वन करेंगे, एवं ये सभी योजनाएँ आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी। इस वर्ष बेरोजगारो को रोजगार के कई अवसर प्राप्त होंगे। आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष अच्छा फलदायक नहीं है।


आर्थिक स्थिति

आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष विशेष फलदायक होगा। व्यापार का विस्तार होगा, एवं आपको अपने कार्यक्षेत्र में विशेष लाभ प्राप्त होगा। व्यवसायिक यात्रा का भी योग बना हुआ है। आपकी स्थायी सम्पति में इस वर्ष वृद्धि होगी। पैतृक सम्पति से संबंधित विवाद का निपटारा होगा, परन्तु इस वर्ष आपको अपनी योजनाओ का गुप्त रूप से ही क्रियान्वन करना पड़ेगा, ताकि आपको विशेष लाभ प्राप्त हो सके। कुल-मिलाकर यह वर्ष आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से उत्तम रहेगा।


पारिवारिक स्थिति

इस वर्ष पारिवारिक स्थिति मिली-जुली रहेगी। आपके कठोर स्वभाव के कारण घर में अक्सर तनाव का माहौल बना रहेगा। माता-पिता के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। संतान की तरफ से आपको शुभ समाचार प्राप्त होंगे। इस वर्ष संतान के नाम से सम्पति का क्रय-विक्रय आपको लाभ प्रदान करेगा। परन्तु संतान के विवाह की चिता आपको बनी रहेगी। जो वर्ष के अंत तक सुलझ जायेगी।


स्वास्थ्य

स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष आपके लिए मिश्रित फलदायक है। छोटी-छोटी मौसमी बीमारियो का सामना आपको समय-समय पर करना पड़ सकता है। रक्तकणो की कमी से शरीर की शक्ति क्षीण होगी, परन्तु शीघ्र ही आप इन बीमारियों पर विजय प्राप्त कर लेंगे। पंडित जी के अनुसार वर्ष का अंतिम भाग स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक बना हुआ है। आप दुगुनी स्फुर्ति से सभी कार्य सम्पन्न करेंगे। एवं आपका स्वास्थ्य अति उत्तम रहेगा।


शिक्षा

शिक्षा की दृष्टि से यह वर्ष विध्यार्थियो के लिए विशेष फलदायक रहेगा। मेष राशि के जातक जिस परीक्षा में भाग लेंगे, उसमे आपको सफलता प्राप्त होगी । उच्च शिक्षा के लिए विदेश यात्रा का भी योग बना हुआ है। बेरोजगारो को रोजगार के कई अवसर प्राप्त होंगे।


जीवनसाथी एवं प्रेम सम्बन्ध

इस वर्ष आपके अपने जीवनसाथी के साथ में सम्बन्ध अधिक मधुर नहीं रहेंगे, बात-बात पर टकराव की स्थिति उत्पन्न होगी, अतः आप अपना धैर्य बनाये रखे, अन्यथा अपने जीवनसाथी का साथ खो देंगे। परन्तु कठिन परिस्थिति में आपको अपने जीवनसाथी का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। जो जातक अविवाहित एवं जिनके प्रेम-प्रसंग चल रहे है, उन्हें प्रेम में सफलता प्राप्त होगी। एवं विवाह का पूर्ण योग बना हुआ है।


सारांश

पंडित राजन जेटली जी के अनुसार कुल-मिलाकर यह वर्ष आपके लिए मिश्रित फलदायक रहेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से आपको इस वर्ष श्वेतार्क गणपति की पूजा-आराधना करनी चाहिए। एवं उन पर दूर्वा (घास) चढ़ानी चाहिए। आपको मंगलवार का व्रत करना चाहिए। एवं मंगलवार के दिन हनुमानजी के दर्शन करने से आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। इस वर्ष शनि की ढैय्या लगने के कारण आपको शनि यंत्र की पूजा-आराधना करनी चाहिए।

पंडित राजन जेटली जी के अनुसार यह वर्ष आपके लिए शुभ एवं मंगलदायक रहे, यही उनकी भगवान से प्रार्थना है। इसी मंगल-कामना के साथ पंडित जी की तरफ से आप सभी को शुभ आशीर्वाद।


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Tuesday, 12 November 2013

नया कारोबार करने से पहले



नया कारोबार करने से पहले

नया कारोबार, नई दुकान या कोई भी नया कार्य करने से पूर्व मिट्टी के पांच पात्र लें जिसमें सवाकिलो सामान आ जाएं। प्रत्येक पात्र में सवा किलो सफेद तिल, सवा किलो पीली सरसों, सवा किलो उड़द, सवा किलो जौ, सवा किलो साबुत मूंग भर दें। मिट्टी के ढक्कन से ढंक कर सभी पात्र को लाल कपड़े से मुंह बांध दें और अपने व्यवसायकि स्थल पर इन पांचों कलश को रख दें। वर्ष भर यह कलश अपनी दुकान में रखें ग्राहकों का आगमन बड़ी सरलता से बढ़ेगा और कारोबारी समस्या का निवारण भी होगा। एक वर्ष के बाद इन संपूर्ण पात्रों को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर बहते पानी में प्रवाह कर दें। और नये पात्र भरकर रख दें।

Monday, 28 October 2013

दीपावली का पर्व ५ दिनों का होता है

दीपावली का पर्व ५ दिनों का होता है.......... कैसे..... आइये जानते है ......

दीपावली रोशनी का त्यौहार है. दीपावली एक संस्कृत शब्द है.... जो दो शब्दों "दीप" और "आवली" से मिलकर बना है. दीप का तात्पर्य दीयों अथवा रोशनी से है जबकि "आवली" का अर्थ है दीपक की कतारें. इसलिए दीपावली की रात घर को दीपको से सजाते हैं. यह पर्व कार्तिक कृष्णपक्ष त्रियोदशी को शुरू होता हैं और कार्तिक शुक्ला द्वितीया तक चलता हैं. यानी की ये ५ दिनों का त्यौहार है. पांचो दिन अलग-अलग देवी - देवताओ की पूजा की जाती है. श्रद्धा और विश्वास से की गयी पूजा सफलता प्रदान करती है.

धनतेरस : - इस शब्द की उत्पत्ति "धन" और "तेरस" दो शब्दों से मिलकर हुई है. जहां "धन" का अर्थ मुद्रा अर्थात् लक्ष्मी से है और "तेरस" शब्द त्रयोदशी तिथि को दर्शाता है. भगवान् श्री धन्वन्तरी जी की इस दिन पूजा की जाती है. संध्या समय अन्न के ऊपर दिया जला कर, घर के मुख्य दरवाजे पर रखा जाता है. इस दिन नए बर्तन खरीदे जाते है, जो शुभता का प्रतीक है.

नरक चतुर्दशी : - धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी होती है, जिसे नरक चौदस भी कहते है. इस दिन छोटी दिवाली मनाई जाती है. इस दिन सब कार्यो से निवृर्त होकर, नहाने से पूर्व सरसों के तेल से मालिश करके, नहाया जाता है. खास तौर पर इस दिन बाबा हनुमान जी की पूजा की जाती है (जो मै अपने पिछले आर्टिकल में बता चूका हु की किस तरह से पूजा करनी है). इस दिन पूजा करने से नरक की यातना नहीं भोगनी पड़ती.

दीपावली : - जैसा की मै ऊपर पहले बता चूका हु की ये पर्व रौशनी का पर्व है, संध्या समय दीपकों की लड़ियाँ लगा दी जाती है. ये दिन भगवान् श्री राम जी के अयोध्या आने की ख़ुशी में मनाया जाता है. इस दिन भगवान् श्री विष्णु जी ने अपने वामन अवतार में माता लक्ष्मी जी को राजा बलि के यहाँ से आज़ाद करवाया था. राजा बलि को आशीर्वाद दिया था की त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या के दिन वो पृथ्वी पर होंगे (राजा बलि आज भी जीवित है, उनका नाम आज भी सप्त्जिवियों में लिया जाता है) और जो इन दिनों में दीप दान करेगा उस पर माता लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देंगी और घर खुशियों से भर जाएगा. इस दिन भगवान् श्री गणेश जी, माता लक्ष्मी जी, श्री कुबेर देवता जी, श्री इंद्र देव जी और माता सरस्वती जी की पूजा का विधान है.

गोवेर्धन पूजा : - दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है. भगवान् श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को उठा कर गोकुल वासियो को इंद्र देव के कोपभाजन से बचाया था. तभी से इनकी पूजा का विधान है. इस दिन भगवान् श्री कृष्ण जी को भोग लगा कर गौ माता, बैल आदि पशुओ की पूजा की जाती है.

भाई दूज : - गोवर्धन पूजा के अगले दिन भैया दूज का विशेष पर्व होता है. इस दिन बहने अपने भाई के लिए व्रत भी रखती है और उनकी सलामती के लिए पूजा करती है. इस दिन भाई अपनी बहिन के घर जाकर तिलक लगवाते है और नारियल गोला बहिन के आशीर्वाद के रूप में लेते है. इस दिन भगवान् श्री चित्र गुप्त जी की भी पूजा का विधान है. ये हमारे जीवन का लेखा - जोखा रखते है और जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए, इसकी प्रेरणा देते है.

Thursday, 24 October 2013

श्री महालक्ष्मी पूजा, दीपोत्सव 3-11-2013 :-



श्री महालक्ष्मी पूजा,  दीपोत्सव 3-11-2013 :- पंडित राजन जेटली

इस वर्ष दीपावली 3 नवंबर को है

तीन नवम्बर को 3 बजकर 35 मिनट से सूर्य ग्रहण लग रहा है। ग्रहण रात में 8 बजबर 59 मिनट पर समाप्त होगा। 
ग्रहण समाप्त होने तक अमावस्था तिथि भी समाप्त हो चुकी होगी, जबकि दीपावली अमावस्या तिथि में मनाई जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद तीन तारीख को कोई भी स्थिर लग्न नहीं होगा।
जबकि दीपावाली पूजन के लिए स्थिर लग्न को शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि स्थिर लग्न में दीपावली पूजन करने से देवी लक्ष्मी स्थिर रहती है और जिससे सुख-समृद्घि बनी रहती है।
ग्रहण का प्रभाव भारत वर्ष में न होने के कारन बिना किसी संशय के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा 3 नवंबर 2013 के दिन करे ज्योतिषशास्त्र की गणना के अनुसार 3 नवंबर को स्थिर लग्न वृश्चिक सुबह 8 बजे से 10 बजे तक होगा।
इसके बाद कुंभ लग्न 1 बजकर 45 मिनट से 3बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
अंतिम स्थिर लग्न वृष 6बजकर 15 मिनट से रात 8 बजे तक रहेगा।

मां लक्ष्मी की पूजा किस मुहूर्त में किन सामग्रियों के साथ की जाय जिससे कि मां लक्ष्मी का आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त हो इस बात की जानकारी सामान्य लोगों को भी होनी चाहिए जिससे सबका कल्याण हो सके ,
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करने से महालक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है , जिसका पालन करके प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकता है और अपना जीवन धन्य कर सकता है।
महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का बड़ा आसन तरीका बता रहा हूँ जिसे आप सब खुद भी कर सकते है
मंत्र :- १:- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महा-लक्ष्म्यै नमः।
२:- ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः
३:- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा
कैसे करें मंत्र जाप और हवन :-गुरुपुष्य योग या सर्वा सिद्धि योग के दिन संकल्प लेकर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके माँ लक्ष्मी कि मूर्ति या श्री यन्त्र के सामने स्फटिक कि माला से मंत्र जाप करे
जप जितना अधिक हो सके उतना अच्छा है। कम से कम 108 बार तो अवश्य करे
निम्न मन्त्रं में से किसी १ मंत्र का चयन करके कमल गट्टे को हवन में मिलाकर 21-51 -108 आहुति अग्नि में डाले .
मां लक्ष्मी कि कृपा से व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है और निर्धनता दूर होती है .

 
सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।