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Saturday, 28 July 2012

वास्तु और ज्योतिष - मोर के पंख


वास्तु और ज्योतिष - मोर के पंख

ज्योतिष शास्त्र में मोर के पंखों का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है.मोर के पंख घर में रखने का बहुत महत्त्व है इसका धार्मिक प्रयोग भी है, इसे भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुकुट पर स्थान दे कर सम्मान दिया. मोर को देवताओं का पक्षी होने का भी गौरव प्राप्त है.मोर सरस्वती देवी का भी वाहन है.इसलिए विद्यार्थी इस पंख को अपनी पाठ्य-पुस्तकों के मध्य भी प्राचीन काल से रखते रहें है.यही मोर भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय का वाहन के रूप में भी प्रतिष्ठित है.आयुर्वेद में भी मोर के पंख से
टी०बी०,फालिज़,दमा,नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का सफलतापूर्वक उपचार संभव होता है.

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घर के दक्षिण-पूर्व कोण में लगाने से बरकत बढती है. अचानक कष्ट नहीं आता है.
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बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे ताकि पंखा चलने पर मोर के पंखो की भी हवा बच्चे को लगे धीरे-धीरे हठ जिद्द कम होती जायेगी.
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मोर सर्प में शत्रुता है अर्थात सर्प, शनि तथा राहू के संयोग से बनता है. यदि मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर-पश्चिम दीवार में या अपनी जेब डायरी में रखा हो तो राहू का दोष कभी भी नहीं परेशान करता है. तथा घर में सर्प, मच्छर, बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का भय नहीं रहता है.
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नवजात बालक के सिर की तरफ दिन-रात एक मोर का पंख चांदी के ताबीज में डाल कर रखने से बालक डरता नहीं है तथा कोई भी नजर दोष और अला-बला से बचा रहता है.
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यदि शत्रु अधिक तंग कर रहें हो तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिन्दूर से मंगलवार या शनिवार रात्री में उसका नाम लिख कर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें प्रातःकाल उठकर बिना नहाये धोए चलते पानी में भा देने से शत्रु, शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगता है.
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काल-सर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिये के खौल के अंदर मोर के पंख सोमवार रात्री काल में डालें तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे. और अपने बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख का पंखा जिसमे कम से कम ११ मोर के पंख तो हों लगा देने से काल सर्प दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है.